Congress: रायपुर अधिवेशन से पहले ही सुलझेगा पायलट-गहलोत विवाद! भारत जोड़ो यात्रा के बाद मुद्दे सुलझाने जरूरी

राजस्थान संकट

नई दिल्ली। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 30 जनवरी को समाप्त हो रही है। यात्रा की समाप्ति के तीन सप्ताह बाद रायपुर में कांग्रेस का बड़ा पूर्ण अधिवेशन शुरू होगा। सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की हो रही है कि रायपुर में होने वाले पूर्ण अधिवेशन से पहले कांग्रेस को कई अहम मुद्दे सुलझाने होंगे। सभी मुद्दे अंदरूनी है और इसको लेकर खुलकर के विवाद भी हो चुका है। पार्टी से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि अधिवेशन में नई कार्य समिति के गठन की शुरुआत तो होगी। लेकिन इस शुरुआत से पहले अंदरूनी विवादित मामलों को सुलझा लेना बेहद जरूरी। फिलहाल अनुमान नहीं लगाया जा रहा है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और पूर्ण अधिवेशन के बीच में उन सभी मुद्दों को आम सहमति के साथ सुलझाया जाएगा जिस पर खुलकर के विवाद चल रहा है। इसमें राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत का विवाद सबसे प्रमुख है।

 
कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की समाप्ति से पहले ही कई बड़े मामलों को सुलझा लिया जाएगा। वह कहते हैं कि ये वो विवादित मामले हैं जो कि पार्टी फोरम के साथ-साथ जनता के बीच में भी जा चुके। पार्टी से जुड़े उक्त नेता का इशारा राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच चल रहे विवाद को लेकर के था। सूत्रों का कहना है कि हाल में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सचिन पायलट और राहुल गांधी की बात हुई है। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि सचिन पायलट की ओर से स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि इस पूरे मामले का जल्द से जल्द पटाक्षेप कर किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचाया जाए। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के समाप्त होने तक अपने बारे में स्पष्ट स्थिति जान लेना चाहते हैं।  

सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी भी रायपुर में होने वाले पूर्ण अधिवेशन से पहले ऐसे किसी भी मामले को वहां तक नहीं ले जाना चाहती है। इसलिए जितने भी विवादित मामले हैं उनका समाधान रायपुर अधिवेशन से पहले किए जाने का पूरा अनुमान है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सिर्फ सचिन पायलट और अशोक गहलोत का ही विवाद नहीं है जो कांग्रेस पार्टी को रायपुर अधिवेशन से पहले समाप्त करना है। वह कहते हैं जिस तरीके से पार्टी ने अपने उदयपुर चिंतन शिविर में एक तय वर्ष से ज्यादा तक पदों पर रहने वाले व्यक्तियों को हटाने और 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों को ज्यादा से ज्यादा जिम्मेदारी दिए जाने का प्रस्ताव पास किया था। उसको लेकर के भी पार्टी में अंदरूनी तौर पर चर्चा हो रही है। उनका कहना है कि हालांकि इस बदलाव को लेकर लोगों में नाराजगी नहीं है लेकिन एक अंदरूनी तौर पर उन पदाधिकारियों और अधिक उम्र के नेताओं में डर तो बन हुआ है कि अगर वह इस बदलाव के दायरे में आते हैं तो उनका क्या होगा। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जिस तरीके से राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है उससे उदयपुर में हुए चिंतन शिविर के प्रस्तावों को अमल में लाने में बहुत आसानी होगी। 

सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही है कि पार्टी में जिस तरीके से नेताओं के बीच में राहुल गांधी की स्वीकार्यता को लेकर के मतभेद थे उस पर भी अब एक राय होनी आवश्यक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के साथ लोगों के बीच में जिस तरीके से राहुल गांधी की छवि बदली है ठीक उसी तरीके से पार्टी के उन नेताओं के बीच में भी राहुल गांधी की छवि बदली है जो राहुल गांधी के ऊपर अलग-अलग तरह के आरोप लगाते थे या राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते थे। राजनीतिक विश्लेषक आरएन शंखधर कहते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा के साथ जिस तरीके से राहुल गांधी को देखने का लोगों का नजरिया बदला है उससे कम से कम कांग्रेस के उन नेताओं की विरोध की आवाज तो जरूर कम हुई होगी जो राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता पर गाहे-बगाहे सवाल उठाते रहते थे।  

हालांकि पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता कहते हैं कि राहुल गांधी कि जिस तरीके की छवि अब सामने आई है दरअसल वह पहले भी उसी तरीके के ही व्यक्ति थे। उनका कहना है की विरोधियों ने उनकी छवि को धूमिल करने के लिए तमाम तरह के प्रचार किए थे। हालांकि उनका मानना है कि कांग्रेस के जो नेता दबी जुबान से या खुलकर के राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाते थे उनके लिए भारत जोड़ो यात्रा आई ओपनर जैसी ही रही है। उनका मानना है कि या कोई बड़ी चुनौती नहीं है। फिर भी अगर उन नेताओं का नजरिया राहुल गांधी को देखने का बदल गया होगा तो निश्चित तौर पर यह पार्टी को और मजबूत करेगा। 

पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेता बताते हैं कि 24 और 25 फरवरी को रायपुर में होने वाले कांग्रेस के पूर्ण अधिवेशन में अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय मामले, किसान एवं कृषि, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण, युवा शिक्षा एवं रोजगार पर विस्तृत चर्चा होगी। हालांकि इस अधिवेशन के शुरू होने से पहले पार्टी अपने उन सभी विवादित मुद्दों को पूरी तरीके से समाप्त करने की कोशिश कर रही है जिसको लेकर के पार्टी फोरम पर और जनता के बीच में मामले पहुंचे हुए हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अनुमान यही लगाया जा रहा है कि जिन राज्यों में नेताओं के बीच में आपसी विवाद चल रहे हैं उन सब का हल निकाल लिया जाएगा। ताकि रायपुर में होने वाले पूर्ण अधिवेशन में किसी तरीके की कोई विषम परिस्थितियां ना पैदा हो। रही बात आपसी मनमुटाव और चर्चाओं की तो उनका कहना है कांग्रेस एक बड़ा दल है। क्योंकि सभी नेताओं की विचारधारा एक है इसीलिए सब एक साथ हैं। कुछ मामलों में अंदरूनी मनमुटाव हो सकता है जिसको कि आपस में बैठकर के सुलझाया जाता है। और ऐसे जो भी मामले होंगे उन सब को सुलझा लिया जाएगा।